मजबूत ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ रहा है मनरेगा

Dial down the FREE Subscription for such premium content on our YouTube channel. How to Add Subscribe Button on YouTube Videos (Subscribe Button PNGs)

इसी सप्ताह मैंने अख़बार में एक खबर पढ़ा था| सोचा था साझा करूँगा| भूल गया था अभी याद आया सोचा अब कर लेता हु| बात मनरेगा को लेकर थी जिसके तहत सरकार गारंटी देती है ग्रामीण स्तर पर कम से कम 100 दिन का रोजगार देने के लिए| पहले 51.73 लाखों लोगों को इसका लाभ मिलता था लेकिन इस NDA की सरकार में इसे घटाकर 23.24 लाख लोगों तक सिमित कर दिया गया| मुझे इसका लॉजिक समझ नहीं आया ऐसा क्यों हुआ| देश में दो ऐसे नेता है जो मुझे आर्थिक रूप से देश के लिए कभी कभी खतरनाक प्रतीत होते है|

पहले है सुभ्रमयम स्वामी जी जिनका मानना है कि अगर वो वित्तमंत्री होते तो देश के सभी लोगो का टैक्स माफ़ कर देते| दुसरे है अरविन्द केजरीवाल जी जिनका फोकस रहता है अंधाधुंन सब्सिडी देने है| हाल के ग्रीस की आर्थिक संकट के परिपेक्ष में अगर सोचे तो आप को मालूम होगा कि उनके संकट का यही दोनों मुख्य कारण थे| टैक्स का कम कलेक्शन तथा गड़बड़ी और अंधाधुंन सरकारी खजानों की लूट|

Decoding World Affairs Telegram Channel

और भी कई कारण रहे है लेकिन ये दोनों मुख्य थे| क्युकी पुरे विश्व में ग्रीस अमेरिका का ‘नाटो’ के बाद सबसे ज्यादा पैसा अपने फ़ौज पर करता है जो उद्देश्यहिन था| ऐसे और भी बहूत उदहारण आपको मिलेंगे| यही कारण है कि भारत में गैस सब्सिडी वेग्रह छोड़ना मुझे एक जायज मुद्दा लगा था| लेकिन जैसे बात मनरेगा की तरफ आती है तो मुझे आश्चर्य होता है| 2008 से समय पूरा विश्व आर्थिक मंदी से जूझ रहा था| सिर्फ भारत उस मंदी में खड़ा रहा उसके पीछे कारण था भारत की मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था|

See also  अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र की सियासत में उलझा बीफ निर्यात

और उस मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक कारण ऐसे स्कीम भी रहे है| ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सीधा सरोकार अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से है ही नहीं| अप्रत्यक्ष रूप से थोडा बहूत जरूर प्रभावित कर सकता है| इसको ऐसे समझा जा सकता है जैसे कुछ हलचल वैश्विक स्तर पर होता है तो यह संभव है कि FDI ढीला हो जाए, FII गिरने लगे और स्टॉक एक्सचेंज प्रभावित हो| लेकिन इसकी वजह से भैंस ना तो दूध देना कम करेगी और नाही मुर्गी अंडा|

इस मजबूत ग्रामीण अर्थयवस्था के पीछे मनमोहन सिंह का स्किल भी एक हिस्सा रहा है| यूपीए की सरकार 2004 में बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्र की ओर थोड़ा-सा ध्यान बढ़ा था| लोगों के हाथों में कुछ पैसे आए ऐसे स्कीम के सहारे| रोजगार कानून की वजह से लोगों को गाँव में एक तरह की गारंटी तो मिली कि 100 दिन का काम मिलेगा| जहाँ गाँवों में कोई विशेष राहत योजनाएँ नहीं चल रही थीं, स्थितियाँ और बिगड़ सकती थीं पर रोजगार कानून ने स्थितियों को संभाला|

निर्यात घटने की वजह से इनमें से काफी लोग वापस जा रहे थे| वो लोग उन्हीं इलाकों में वापस जा रहे थे जहाँ स्थितियाँ पहले ही खराब थी। नक्सलवाद की समस्या थी, विकास न होने की समस्या थी, आधारभूत ढाँचे के न होने की समस्या थी| यह पूरी स्थिति विस्फोटक हो सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और स्थिति संभली रही और इसकी वजह बना था ऐसे रोजगार गारंटी कानून| मुझे नहीं मालूम कि उनका इस विषय पर क्या प्लान है जिससे इसे घटाना मुनासिब समझा गया लेकिन ऐसे कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नजरिया से काफी स्वस्थ्य है|

See also  अशांत समाज का कारण जातिवादी टकराव

 

Spread the love

Support us

Hard work should be paid. It is free for all. Those who could not pay for the content can avail quality services free of cost. But those who have the ability to pay for the quality content he/she is receiving should pay as per his/her convenience. Team DWA will be highly thankful for your support.

 

Be the first to review “मजबूत ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ रहा है मनरेगा”

Blog content

There are no reviews yet.

Decoding World Affairs Telegram Channel
error: Alert: Content is protected !!