पडोसी देशों के साथ अच्छे संबंध क्यों जरूरी है?

किसी भी देश के लिए पड़ोस बहुत महत्वपूर्ण होता है| पाकिस्तानी एयरमार्शल रहे अशगर खान अपने इंटरव्यू में भारत-पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हुए यह एहसास दिलाने की कोशिश की थी कि पडोसी मुल्क हमेशा देश को खुशहाल देखना ही चाहेगा| यह इंटरव्यू यूट्यूब पर मौजूद है आप देख सकते है| पत्रकार उनसे सवाल पूछते है कि पाकिस्तानी आवाम को हमेशा डराया जाता है कि हिंदुस्तान हमेशा पाकिस्तान को बर्बाद कर देगा, तहस नहस कर देगा, इसमें कितनी सच्चाई है? इस पर अशगर खान ने बड़ा ही बढ़िया जवाब दिया कि भारत कभी पाकिस्तान को बर्बाद होने नहीं देना चाहेगा| इसके पीछे उन्होंने कुछ तर्क दिए| वो कहते है कि अब तक हमेशा पाकिस्तान ने ही भारत पर हमला किया है| भारत ने सिर्फ डिफेंड किया है जिसमे उसकी जीत हुई है| अशगर खान जब कमांडर इन चीफ थे तब अखनूर में अयूब खान ने टैंक भेज दी थी और उन्होंने इतल्ला तक नहीं किया था| वो तार्किक व्यक्ति रहे है जिन्होंने हमेशा हकीकत का पक्ष अपने कार्यकाल के दौरान रखा करते थे जो सिस्टम को हजम नहीं होती थी|

शायद यही कारण है कि अयूब खान ने ना तो युद्ध के बारे में उन्हें इतल्ला किया और नाही पाकिस्तानी अख़बार उनकी लेखें तक छापने को तैयार नहीं होते थे| वो कहते है कि हिंदुस्तान की हिमायत नहीं कर रहे बल्कि हकीकत बयाँ करते है जो लोग सुनना पसंद नहीं करते| आगे अपनी बातें जोड़ते हुए कहते है कि हिंदुस्तान हर हाल में चाहेगा कि पाकिस्तान खुशहाल रहे नहीं तो हिंदुस्तान मुसीबत में पड़ जाएगी| काफी हद तक यह बात सही भी है| उनका कहना है कि अगर खुदा-न-खास्ता पाकिस्तान बर्बाद होता है तो ये जो जिहादी है ये सब भारत के सर आ जाएँगे| वो कहते है कि पाकिस्तान अपने बजट का लगभग 40% सिर्फ सेना पर खर्च करते है और मात्र एक प्रतिशत शिक्षा पर जिससे पूरा मुल्क जिहादत की और बढ़ रहा है| वही दूसरी और मलेशिया और इंडोनेसिया का उदहारण देते हुए कहते है कि वहाँ लगभग 30% शिक्षा पर खर्च होता है| मतलब यह पाकिस्तान को इतनी बड़ी फ़ौज की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्युकी पाकिस्तान का भारत से कोई खतरा नहीं है|

अगर राजनितिक सेंटिमेंट से दूर होकर एक पढ़े लिखे अच्छे नागरिक के रूप में सोचें तो पता चलेगा कि और भी उदाहरण है जो यह प्रदर्शित करता है कि हिंदुस्तान पाकिस्तान को हमेशा समृद्ध रखना चाहता है| जैसे सीमा पर टेंशन के बावजूद भारत ने पाकिस्तान को MFN(मोस्ट फेवर्ड नेशन) का दर्जा दिया हुआ है जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार व्यापार होता रहे| तमाम राजनितिक पार्टियाँ हमारे देश में इसपर राजनीती करते आए है कि आखिर हमने MFN का दर्जा पाकिस्तान को क्यों दिया है| मुझे लगता है कि शायद अब लोगों को यह समझ आ गई होगी कि हमने ऐसा क्यों किया हो| क्यों हम तमाम टेंशन के बावजूद प्याज, कपास आदि आयात करते रहे है| हमारी संस्कृति, खान-पान, भाषा सबकुछ एक जैसा है लेकिन हम झूठी देशभक्ति के पर्दे होने के कारण हम कभी इसके पोटेंशियल को पहचान नहीं पाए है| हमारे देश की बनी फ़िल्में जो पाकिस्तान में दिखाई जाती है उसमे हमारा भी तो फायदा होता है| अगर सीमांत इलाका में जाएंगे तो पाएंगे कि भारत-पाकिस्तान के बीच बेटी रोटी का रिश्ता रहा है|

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इसके अलावां एक और उदाहरण है जो इस बात की पुष्टि करता है| मुझे पहले तक यही बात पता थी कि भारत गेहूँ आयात करता है| मुझे लगता था कि शायद अपने खपत के मुताबित उत्पादन कर पाने में सक्षम नहीं है लेकिन कुछ दिन पहले एक मित्र प्रसन्न प्रभाकर जी ने अपने पोस्ट में APEDA के डाटा के सहारे मुझे संतुष्ट किया था कि नहीं हम निर्यात भी करते है| तब उलझन और बढ़ गई जब हमारे पास पर्याप्त है तभी तो निर्यात करते है फिर आयात का क्या मतलब निकलता है| फिर खोजना शुरू किया जब जाकर पता चला कि अपने पडोसी मुल्कों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हमें हमारे पास पर्याप्त होने के बावजूद हमें खरीदना पड़ता है जिससे उसका बाजार चलता रहे| मान लीजिए कि उनका सामान की खरीद फ़रोख नहीं हो पा रही है तो स्वाभाविक सी बात है कि उनके लोगो को सही कीमत भी नहीं मिल पाएगी| जब उन्हें पर्याप्त पैसे नहीं मिल पाएँगे जिससे उनका घर चल सके तो जिहादियों के बंदूक थामेंगे जो अक्सर तमाम तरह की लालचें देते रहते है| यह भारत के लिए मुसीबत बन सकता है|

इसके अलावां फेसबुक जैसे आभासी मीडिया पर अक्सर सुना जाता है कि भारत सिंध नदी का पानी का बंद क्यों नहीं कर देता जो पाकिस्तान से होकर अरब सागर में गिरता है| उसका उत्तर भी इसी कांसेप्ट में छिपा हुआ है| यह सत्य है कि पाकिस्तान के 80 प्रतिशत से ज्यादा किसान भारत से गुजरने वाली सिंध नदी पर निर्भर करते है| एक मुसीबत तो यह है कि भारत के पास कोई ऐसा स्टोरेज प्लान नहीं है जो बंद करने के पानी का कहीं संग्रह कर सके| प्राकृतिक आपदा आने की सम्भावना बनी रहती है| यह एक बात हो गई| लेकिन दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के जो किसान है जो अपना सही से जीवन यापन कर रहे है, कल गए खेती ख़त्म होती है और बेरोजगार होते है तो वो भी उसी वाहाबी विचारधारा से प्रभावित होंगे और जिहादियों में शामिल होंगे| जिहादियों को उन्हें भड़काने का अच्छा ख़ासा मौका भी मिल जाएगा| अगर ऐसा होता है तो भारत की सेना को डिफेंड करना मुश्किल हो जाएगा| क्युकी वो तो सर कफ़न बांधकर आए फिदायीन होते है जिनका उद्देश्य ही मरना होता है|

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ऐसे में घाटा हमारा होगा| हमें अतरिक्त पैसे अपने सुरक्षा पर खर्च करने पड़ेंगे| जब अतरिक्त पैसे उधर खर्च होंगे तो स्वाभाविक सी बात है कि कहीं न कहीं कटौती करनी पड़ेसी| इससे हमारा शिक्षा, स्वास्थ्य या कृषि पर दिए जाने वाला इंसेंटिवस पर बूरा असर पड़ेगा| कहीं न कहीं भारत नकारात्मक रूप से प्रभावित होगा ही| अगर थोडा तार्किक रूप से सोचे तो पाएंगे कि भविष्य में मान लीजिए कि अमेरिका को भारत से दिक्कत होती है और उसके कहीं किसी रूप में खतरा महसूस होता है तो क्या वो डायरेक्ट वहाँ से हम पर हमला कर सकता है? बिल्कुल नहीं| उनके फाइटर प्लेन को इंधन के लिए कहीं आस पास शरण लेना ही पड़ेगा| जब आपका पड़ोस सही नहीं होगा तो आप कैसे सुरक्षित होंगे? इस बात को मजबूत करने के लिए एक उदहारण पेश करता हूँ| कुछ साल पहले अमेरिका ने पाकिस्तान में ओसामा बिल लादेन को मारा| क्या वो अमेरिका से सीधा यहाँ आया था? बिल्कुल नहीं अफगानिस्तान में उसका बेस कैंप था जहाँ तैयारियाँ की थी और वहीं से अंजाम दिया था|

भारत और पाकिस्तान ऐसे दो देश है जिसपर चाइना और पाकिस्तान हमेशा प्रॉक्सी वार खेलता आया है| ताजा उदहारण है इस तथ्य को मजबूत बनाने के लिए| UN में जिस मसूद अजहर को आतंकवादी मानकर अमेरिका भारत को समर्थन करता है उसी आतंकवादी को चीन यह करके स्वीकारने से मना कर देता है कि यह भारत का आंतरिक और व्यक्तिगत दिक्कत है| और यही कारण है कि आज भी कश्मीर भारत और पाकिस्तान के लिए विवादित बना हुआ है| अमेरिका की पूरी चाहत रही है कि पूरा कश्मीर पाकिस्तान के हाथ लग जाए| अब सवाल होता है कि उसका इसमें क्या फायदा है? अमेरिका को कुछ भी खुराफात करने के लिए थोड़े बहुत कारण चाहिए| मान लीजिए कि कल गए अगर पूरा कश्मीर पाकिस्तान के हाथ जाता है तो अमेरिका को बिल्कुल देर नहीं लगेगा वहाँ इराक की तरह बमबारी करने में| कारण पहले से तैयार है कि कश्मीर में पाकिस्तान आतंकवादियों का पालन पोषण करता रहा है| मुझे नहीं लगता है कि अमेरिका के इस कारण को कोई गलत ठहरा भी पाएगा क्युकी यह सच्चाई है| फिर वहाँ बमबारी कर विश्व सुरक्षा के सह पर अपना कैंप डालेगा और भारत और चीन दोनों देशों पर अपना दबदबा कायम कर सकता है|

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यही कारण है कि किसी भी देश के लिए उसका पड़ोसी सुखी होना चाहिए| हमने बांग्लादेश के साथ भी रिश्ते ख़राब किए थे लेकिन वर्तमान सरकार ने बड़ा ही आसानी से भूमि विवाद को सुलझा दिया जो सालों से टेंशन देता आया था| हमने सबसे ज्यादा जो गवाया है वो है अपने पड़ोस से रिश्ते| यही गलती हमने नेपाल के बने संविधान पर बेतुके तरह से विरोध करके किया| यह सही बात है कि मधेसी लोगों के अधिकार की अनदेखी वहाँ के वामपंथी शासन ने चाइना के सह पर किया था| लेकिन उसे हमें आक्रामकता से नहीं बल्कि मधेशियों को जागरूक करके कर सकते थे जैसे हमने बांग्लादेश विभाजन के समय किया था| हिंसक रूप से नहीं बल्कि राजनितिक रूप से| यही गलती श्रीलंका में हुई जिसका परिणाम हमारे सामने है कि वहाँ के बंदरगाहों पर चाइना ने फाइनेंस करके कब्ज़ा किया हुआ है| ऐसे ही पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर भी चाइना के फाइनेंस करके कब्ज़ा किया हुआ है और अपना बाजार सुदृढ़ किया है| ये सारे बंदरगाह युद्ध के दौरान चाइना भारत को घेरने के लिए कर सकता है| अगर हमने रिश्ते सही रखे होते तो शायद इस प्रकार का खतरा पैदा नहीं होता|

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