लैंगिक समानता अउरी स्वतंत्रता खातिर समर्पित एगो राइडर (भोजपुरी)

राइडर राकेश लैंगिक समानता अउरी स्वतंत्रता खातिर समर्पित एगो राइड ‘राइड फॉर जेंडर फ्रीडम’ चला रहल बानी| पाहिले इहाँ के मीडिया रिसर्चर अउरी कंटेंट एडिटर के रूप में CSDS के साथे काम करत रही| कुछ समय कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के साथे भी काम कईनी| कुछ आन्दोलन से भी जुडाव रहल बा आ लेखनी पढनी उहाँ के हथियार रहल बा| कुछ समय उहाँ के स्टॉप एसिड अटैक आन्दोलन से भी जुडनी| पीड़ित के साथे कोर्ट कचहरी जात रहनी अउरी न्याय दिलवावे खातिर गुहार लगावत रहनी|

लेकिन ओहिजा उहाँ के लागल कि एह काम एकर लॉन्ग टर्म खातिर हल नईखे ढूंढल जा सकत| अइसन घरेलु हिंसा, एसिड अटैक, भ्रूण हत्या अउरी तमाम लैंगिक भेदभाव के हल ढूंढल जरूरी बा| एकरा बारे में जानल जरूरी बा कि एकर शिक्षा दीक्षा कहाँ से हो रहल बा| इंजीनियरिंग करेके बा त बीटेक करेला लोग आ डॉक्टरी करेके रहेला त लोग MBBS करेला लेकिन अइसन हिंसा के शिक्षा कहाँ मिलेला ?

एही खोज में साइकिल के माध्यम बनाके आज उहाँ के पूरा भारत भ्रमण कर रहल बानी| ग्राउंड लेवल प संवाद करके हल के बारे में चर्चा करनी| मार्च 2014 में दक्षिण भारत के चेन्नई से शुरू कईले बानी आज भी राइड कर रहल बानी| इहाँ के चार हजार किलोमीटर से ऊपर साइकिल से राइड कर चुकल बानी| उहाँ के ज्यादातर कोशिश रहेला कि नौजवान से एह बारे में बात कर सकी अउरी समझ सकी|

चाय के दुकान, चौक, चौराहा, स्कूल, कॉलेज आदि जगह एगो छोट-छोट नुक्कड़ नाटक के सहारे आपन बात पहुचावे के कोशिश करीला| सबसे बड बात इ कि उहाँ के हर सभा के अंत में एगो प्रतिज्ञा जरूर दिवाइना| देश में कवनो बात के कोसल काफी आसान बा लेकिन ओह समस्या के करीब गईल आ हल ढूंढल काफी चुनौती भरल काम बा| हम एह मुद्दा के एह से उठावनी ह काहे कि इ एगो गंभीर मुद्दा बा जवना के जानल आ समझल काफी जरूरी बा|

आखिर शुरू कहाँ से होला ?

लैंगिक असमानता अउरी गुलामी के पहिला पाठशाला घर ह| ओहिजे से इस सब चीज पनपे शुरू होला| उम्र के साथे आगे चलके इहे घरेलु हिंसा अउरी एसिड अटैक के रूप ले लेला| हालाँकि घरेलु हिंसा, अपहरण, गैंग रेप आ एसिड अटैक एकर लक्षण ह| कारण कही अउर छुपल बा| जब से इ कूल्ह चीज ख़त्म नइखे होत तबले लैंगिक समानता के सपना नइखे देखल जा सकत| एकर एगो अउर कारण बा पारंपरिक दहेज़ प्रथा| घर से ही एकरा के पहिलही गढ़ दियाला दिमाग में, दोसरा शब्द में कही त एकतरह के बोली लगा दिआला कि कतना कीमत बा| लईका भले अपना पूरा जिनगी के कमाई से स्कॉर्पियो ना खरीद पावे लेकिन जब बियाह होला त एकर मांग करेला|

खरीदला के बाद तेल भरे के भी बेवत ना रही जाला| तबो एगो ‘इगो’ खातिर इ सब मांगेला| ओकरा तनी मनी पढला लिखला के घमंड रहेला आ ओकरा लागेला कि एह सब से ओकर ढेर नाम होई| शादी तय हो जाला, खुदा न खस्ता कभी कभार एक समय में लड़की के बाबूजी सारा पईसा देवे में सक्षम ना हो पावेले| तब ओह लईकी के माध्यम बनाके शादी के बाद वसूली करे के कोशिश कईल जाला जईसे मानी कर्ज होखे ओह लोग प| इ प्रक्रिया ठीक अपरहनकर्ता लेखा बा| फिरौती मांगेला आ दबाव बनावे खातिर शोषण कईल जाला जवना के घरेलु हिंसा के नाम से हमनी के लक्षण के रूप में लउकेला|

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एकर अउर भी लोग कारन बा जईसे संस्कृति के ठेकेदार लोग| खासकर रुआ अगर नजर हरियाणा दने घुमाईम त एकर प्रभाव काफी व्यापक बा| लोग खाप पंचायत कहेला| उ लोग इ निर्णय लेवेला कि लड़की के का पहिने के चाही, केकरा से शादी करेके चाही आ समाज में कईसे रहे के चाही? अगर बारीकी से ओह लोग बात के समझम त एगो बात निर्णय के रूप में निकल के आई कि उ लोग लड़की के एगो बंधक के रूप में बनावे के कोशिश करेला| ओह लोग के निर्णय लोकतांत्रिक कईसे हो सकेला? लोग काहे मानो? के जनता चुनले बा का? ओह लोग के पंचायत में औरत के भी रखती जा अगर सच में संस्कृति के बरियार धरोहर बानी तब|

ओने भ्रूण हत्या आ शोषण के भी काफी व्यापक प्रभाव रहल बा| इहे कारण बा कि ओहिजा के लिंग अनुपात पूरा देश के अपेक्षाकृत कम रहेला| ताजुब के बात इ बा कि प्रशासन के भी साथ देवे के मजबूर होखे के परेला| एकरा ले दुर्भाग्य के का बात हो सकेला? प्रशासन में कार्यरत लोग के भय रहेला कि उ लोग भी ओही समाज के अंग ह कही ओह लोग के ‘हुक्का पानी’ (एक प्रकार से समाज से बहिष्कार) मत बंद हो जाव| गैंगरेप जईसन घटना के बाद भी राजनितिक मैदान के तरफ से भी बड़ा अजीबो गरीब बयान लईकिन दने इशारा करत ही आवेला|

एगो पुरुष प्रधान वाला फीलिंग लोग के मन रहेला| कव बे अइसन घटना भी सुने के मिलल बा जवना में लोग लडकिन के काम ना करे देवेला| अगर लड़की तनिको विरोध करेले आ काम करे के कोशिश प जोर देले त ओकरा तेजाब हमला जईसन हिंसक हमला के सामना करे के पडला| लोग में जागरूकता के अभी कमी बा| लडकिन के राजनितिक भागीदारी ढंग से नईखे मिल पावत| अगर कवनो लईकी सशक्त होखे के ठानत भी बिया त ओकरा हजार तरह के पीड़ा आ शोषण से गुजरे के परत बा| फिल्म इंडस्ट्रीज में भी इहे हाल बा| कवन लड़की ग्राउंड लेवल से उठ के जाए के सोचत बिया त ओकरा तमाम तरह के बाधा के सामना करे के पडत बा|

एह से इ कहल बिल्कुल मुनासिब नईखे कि खाली कम पढल लिखल लोग आ ग्रामीण परिवेश से ही अइसन समस्या उठेला| जबकी सच्चाई इ बा कि सबसे ज्यादा एकर समस्या पढल लिखल लोग में ही बा| तनी पढ़ लिख के अकड़ में आके देहज मांगे शुरू इहे लोग करेला, एकतरफा इश्क के बर्दाश ना कर पावे ला त एगो बदला के भावना में एसिड अटैक इहे लोग करेला, गैंग रेप जईसन मसला प उल्टा पुल्टा टिपण्णी आ बचावे के कोशिश इहे लोग करेला| एह राइड के मूल उद्देश्य बा कि ग्राउंड लेवल प जाके एह सब विषय के बारे में बढ़िया अनुभव लेवेके आ विचार जाने के फिर ओकर हल ढूंढे के प्रयास करेके|

लैंगिक समानता काहे जरूरी बा?

हाल में क्रिस्टीन लार्गाड़े, IMF के मैनेजिंग डायरेक्टर एगो बरियार चीज कहले रही कि काम के दिशा में लैंगिक समानता से भारत के 27%, US के 5% आ जापान के 9% जीडीपी में बढ़ोतरी होई| एगो अउरी खास बात बतावत बानी कि हमनी के देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से कुल मिलाके खाली 14% ही जीडीपी में योगदान बा, जवन की एकदम आधा बा ओह कैलकुलेशन के मुकाबले| इहे ना हमनी के शिक्षा प 2-3 % जीडीपी के खर्च कर पावेनीजा आ रिसर्च प खाली 0.85%| हतना बड अर्थव्यवस्था वाला संसाधन लैंगिक असमानता के वजह से दबल बा जवना के पूरा पूरा विश्वास में लावल बेहद जरूरी बा| अब रुआ एह बात से अंदाजा लगा लिही कि कतना फायदा बा|

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अगर ओह लोग के कैलकुलेशन साचो सही बा त हमनी के देश में लोग महिला आरक्षण प काहे चिचिआला ? एकरा खातिर सेल्फी के अलावां देश में कवन विशेष कदम उठावल गईल बा ? पलायन करके तमाम शहर में घरेलु से लेके कंपनी तक काम करे वाली मेहरारुन खातिर कवनो एक्टिव सुरक्षा के बंदोबस्त बा जवना से तनख्वाह समय मिल सके अउरी शारीरिक शोषण से बचावल जा सके| शारीरिक, मानसिक, सामाजिक अउरी सामाजिक हिंसा के रोके के क़ानून होते हुए भी काहे असहाय बा| इहाँ तक कि कुछ केस खातिर फांसी के भी सजा के प्रावधान बा लेकिन अबले इ विश्वास में काहे ना आइल? इ सब चुनौती बा जवना प गौर कईल काफी जरूरी बा तबे लैंगिक असमानता कम हो पाई|

लैंगिक समानता जरूरी बा ताकी राजनितिक अउरी आर्थिक रूप से महिला के भागीदारी सुनिश्चित कईल जा सके| चुकी महिला के सारा बात के पुरुष नइखे रख सकत उच्च स्तर प| अउरी नाही सही निर्णय ले सकत बा| एह से महिला के ओह स्तर प आइल जरूरी बा ताकि आपन हर तरह से समस्या के रख सको अउरी ओकर निदान कर सके| एकरा खातिर आरक्षण एगो माध्यम हो सकेला| एगो अउरी बरियार फैक्ट इ बा कि भारत में लगभग 50% औरत के सिर्फ 2% एसेट प हक़ बा| एह खाई के मिटावल जरूरी बा| चुकी जईसही धीरे धीरे पईसा के यूनिफार्म बटवारा होखे लागी ओसही आत्मविश्वास बढ़ी आ इ असमानता अपने आपे कम होखे लागी|

लैंगिक समानता से ना सिर्फ आर्थिक बल्कि सामाजिक न्याय अउरी राजनितिक भागीदारी भी सुनिश्चित कईल जा सकत बा| जतना भी कानून बनल बा औरत के परिपेक्ष में उ सब तबे बेहतर तरीके से विश्वास में आ सकत बा जब ओह वर्ग के समान अधिकार मिलने शुरू हो जाए| काहे कि हमेशा से इहे कहल जात रहल बा कि कानून त बा लेकिन इम्प्लेमेंट नइखे हो पावत| लैंगिक समानता उद्योग जगत के ‘ह्यूमन कैपिटल’ लेखा बा| जब ले ह्यूमन कैपिटल विश्वास में ना आई तब ले सारा संसाधन, कैपिटल, लेबर सब के सब बेकार बा|

जन जागरूकता अउरी सरकारी पहल के खास जरूरत

एह समस्या के हल करे खातिर जन जागरूकता काफी जरूरी बा| जवना के राकेश जी विश्वास में ला रहल बाड़े अपना राइडिंग के माध्यम से| जगह जगह सभा करके आपन बात भी राखिले आशपथ भी दिलवाई ले| हमनी के देश में NGO अउरी जनसँख्या के अनुपात पुलिस अउरी जनसख्या के अनुपात से ज्यादा बा| तबो NGO जनजागरूकता लावे में भी असफल रहल बिया| ओकरा पीछे कारण बा कि NGO के खुद राजनीतिकरण हो रहल बा| जनजागरूकता लावे के कई गो माध्यम हो सकेला| स्कूल आ कॉलेज स्तर पर एह उद्देश्य के शुरुआत कईल जा सकत बा| सबसे बड बात इ कि अइसन चीज के शैक्षिण संस्थान से जोडल काफी जरूरी बा|

लडकिन के निजी समस्या के सम्बंधित कवनो शैक्षणिक पहल नईखे| नाही लडकिन के राजनितिक भागीदारी बढ़िया बा जवना से उ आपन बात रख सको| सरकार के तरफ से एह सब के पहल बहूत जरूरी बा| शिक्षा ठीक बा लेकिन नैतिक शिक्षा के निश्चित रूप से कमी बा| हमरा समझ से कम से कम 12 कक्षा तक एकर जरूरत बा| आर्थिक समानता बढावल बेहद जरूरी बा जवना से लैंगिक समानता के विश्वास बढ़ी| एक ही नौकरी के महिला आ पुरुष के इनकम में भारी अंतर बा| उ रुढ़िवादी धारणा के ख़त्म करे के पड़ी कि महिला जाती पुरुष जाती वाला काम ना कर सकेला|

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अइसन असमानता शुरू करे में हमनी के प्रणाली के भी बहूत बड भूमिका बा| जईसे उदाहरन के रूप में जब नर्सरी अउरी एलकेजी में लड़का अउरी लड़की साथे शिक्षा लेत रहेला लेकिन जईसे कुछ क्लास ऊपर जाला उ खाचा बाँट दिहल जाला कि लड़की एक साथे अलगे आ लड़का अलगे बईठीहे| असमानता आ भेदभाव ओहिजो से शुरू होला| ओह असमानता के स्कूल लेवल प सरकारी पहल से खत्म कईल जा सकत बा| इ संभव बा काहे कि जवना घरी छुआछुत ख़त्म करे खातिर आवाहन कईल गईल रहे आ सरकारी कानून बनल रहे तब कोई के विश्वास ना होत रहे कि कबो इ ख़त्म हो पाई| लेकिन ओकर परिणाम कुछ साल बाद आज हमनी के सोझा बा|

अपवाद के छोड़ देहल जाव त शायद ही कवनो कोना कोई जहाँ अभी भी ओह चीज के प्रभाव लउकी| बिहार में नितीश कुमार एह दिशा में काफी अच्छा काम कईले बानी| साइकिल वेग्रह लडकिन के सशक्त करे अउरी सामाजिक रुढ़िवादी धारणा तुरे में काफी अहम भूमिका निभईले बा| अईसन अउरी पहल के जरूरत बा जवना से एक एक करके लड़की घर से बहरी निकल के आपन क्षमता देखा पाव ताकी ओह लोग के आय के भी राष्ट्रिय आय में शामिल कईल जा सके|

अंत में निष्कर्ष के रूप में हम इहे कहल चाहब सब लोग के आपन योगदान देवे के चाही एह समस्या के हल करे खातिर| सरकार केहू के बनो उ तब तक कुछ ना कर पाई जब तक लोग ओह चीज के प्रति जागरूक ना हो पाई| जे भी अइसन अभियान चलावत बा ओकरा के हर संभव मदद करे के चाही जवना से आपन लड़ाई के जारी रख सकस| राकेश जी के एगो इंटरव्यू में सुनले रही कि कव बे रोड प, चाय के दुकान के बहरी, कवनो स्कूल के सोझा रात गुजरले बानी| अइसन आदमिन के मेहनत में हमेशा सहयोग करे के चाही जवना से उत्साह अउरी आत्मविश्वास बढ़ो अउरी बेहतर करे के प्रयास कर सकस|

लैंगिक असमानता प हर कोई के अपना घर से अपना बेटा आ बेटी से सोचे के शुरुआत करे के चाही| बढ़िया शिक्षा दीक्षा आ संस्कार दिही जवना से समाज में एगो बढ़िया प्रतिबिम्ब जाव| डिग्री वाला शिक्षा अलग चीज हो गईल आ अभिभावक वाला शिक्षा अलग चीज हो गईल| हमरा समझ से सरकार के तरफ से भी कुछ अईसन पहल के आवाहन करे के चाही जवना से बच्चा के साथे साथे अभिभावक के एगो वोकेशनल ट्रेनिंग देवे के जरूरत बा जवना से अभिभावक के भी ज्ञान होखे कि किशोरी अवस्था में लईका आ लडकिन के कईसे हैंडल करे के चाही|

नोट :- हमार इ लेख ‘हेल्लो भोजपुरी’ के दिसम्बर अंक में छप चुकल बा|

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