सोवियत क्रांति के सौ बारिस बाद साम्यवादी व्यवस्था प चिंतन (भोजपुरी)

आज के ठीक सौ बारिस पाहिले 1917 में रूस में क्रांति आइल रहे| इ क्रांति एगो अलग प्रकार के विचार के जमीन प उतारे के प्लेटफार्म देले रहे अउरी मानव इतिहास के एगो नया धरातल देले रहे| ठीक एही दिने मजदुर किसानन के विद्रोह भईल रहे आ लगभग चार सौ साल पुरान जारशाही व्यवस्था के खात्मा भईल रहे| सत्ता शुरुआत में विद्रोही गुटन के हाथ आइल लेकिन लगभग 10 महिना बाद लेनिन के वापस अईला के बाद बलादिमिर लेनिन के नेतृत्व में बोल्सविक क्रांति के बाद समाजवादी व्यवस्था के स्थापना कईल गईल| एह क्रांति के पाहिले साम्यवादी विचार खाली कागजे प रहे अउरी विचार जगत के खाली हिस्सा रहे, लेकिन एह क्रांति के बाद ओह साम्यवादी विचार के परिक्षण करेके मौका जरूर मिलल रहे| सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी एह विचार के वास्तविक रूप देले रहे| इ क्रांति मय दुनिया में समता आधारित समाज बनावे के सपना जगवलस| अमेरिका, यूरोप जईसन देश जे एह व्यवस्था से नाखुश रहे ओकरा भय पैदा होखे लागल रहे अउरी उ लोग भी वेलफेयर स्टेट के स्थापना करे शुरू कर देले रहे|

ओही चीज जब आज देखे के आ समझे के कोशिश कईल जाता तब मालूम होता कि व्यवस्था चरमरा गईल बा| अलग-अलग देश में एकरा के अपना अपना हिसाब से इन्टरप्रेट कईल गईल बा| सोवियत यूनियन के विघटन 26 साल पाहिले हो चुकल बा| पश्चिमी देश जवन जनकल्याणकारी मॉडल के पीछे छोड़त नवउदारवाद के दने आगे बढ़ चुकल रहे अब ओह लोग के भी नाकामी उजागर हो रहल बा| 21वीं सदी में आइल 2008 के आइल वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद से पूरा दुनिया में एगो बेचैनी पैदा कर देले बा| अइसन उम्मीद लगावल जात रहे कि सोवियत यूनियन के ढह गईला के बाद पूरा दुनिया उदारवाद, पूंजीवाद अउरी लोकतंत्र के मॉडल प चली| जब सोवियत मॉडल विफल हो चुकल बा आ उदारवादी लोकतंत्र बरियार संकट में बा, तब तमाम देशन में पैदा भईल नया पार्टी का कवनो प्रकार के उम्मीद जगावत बा जवन समाजवाद के अंगूरी धके आगे लेके जाव| का सच में समाजवाद खातिर कवनो प्रकार के जुड़ाव लोगन के जेहन में आज भी बा कि बदलत समय के साथे एगो घटना मात्र बनके समाजवाद, इतिहास के नदी में एगो छोट सहायक नदी बनके समा गईल|

साल 1917 में दू गो प्रमुख क्रांति आइल रहे पहिला जवना से जारशाही ख़त्म कईल गईल आ दूसरा जवना में सोवियत संघ के स्थापना कईल गईल| एकर शुरुआत मूलतः फरवरी 1917 से शुरू भईल आ अक्टूबर 1917 में जाके ख़त्म भईल| रूस देश भी खेती लायक देश रहे जहाँ किसान अउरी मजदुर में हमेशा शोषण होत रहे| औद्योगिक विकास कवनो ख़ास ना रहे| रईस अउरी बड वर्ग के आपन अलग दबदबा रहत रहे| 20वां शताब्दी के शुरुआत में लोकतंत्र अउरी व्यक्तिगत अधिकार आ जवाबदेही सरकार के विचार के उद्गम भईल आ चर्चा होखे लागल| पश्चिमी यूरोप से होत रूस में भी इ चर्चा के विषय बन गईल| जारशाही व्यवस्था रूस में पनपत एह विचार से प्रभावित हो सकत रहे| एह से जार निकोलस कभीयो एह विचार के पक्ष में ना रहन| एह विचार में आ क्रांति में दू गो विशेष विचारक के अहम भूमिका रहे| पहिला कार्ल मार्क्स अउरी दूसरा व्लादिमीर लेनिन| कार्ल मार्क्स के कहनाम रहे कि जे बहुसंख्यक में बा, ओकरा शासन करे के चाही आ संसाधन ओकरा हाथ में रहे के चाही| इहे मार्क्स के थ्योरी रहे जवना के बाद में लेनिन मॉडिफाई कईले रहन|

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लेनिन के कहनाम रहे कि अगर मजदुर के हाथ में सत्ता के स्थानांतर करे के बा त समय लागी एह से एगो सरकार होखे के चाही जवना में मजदूरन के सीधा तानाशाही होखे| एही से एह फिलोसफी के मार्क्सिस्ट-लिनिनिस्ट थ्योरी कहल गईल| एह दुनो विचारक लोग के लक्ष्य इहे रहे कि जवन भी सत्ता होखे उ मजदूरन के हित में होखे के चाही| 19 वां शताब्दी के अंत में RSDP (रुस्सियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी) के स्थापना भईल रहे| ओकरा ठीक चार साल पाहिले जारशाही शासन व्यवस्था के माध्यम से निकोलस सत्ता के अपना हाथ में लेले रहन| राजनितिक नियतिनुसार कबो एकता नईखे बन पाइल| हमेशा ओकर विघटन भईले बा| कवनो दू पार्ट में टूटेला आ कवनो कतरा बन के टूटी के बिखर जाला| भारतीय राजनितिक इतिहास अउरी वर्तमान में कईएक गो उदाहरन बा| खैर, एह पार्टी के भी दू पार्टी में विघटन भईल| पहिला भाग भईल बोल्शेविक जवना के मतलब बहुसंख्यक होला लेकिन वास्तव में अल्पसंख्यक लोग होला| दूसरा भाग भईल मेन्शेविक जवना में मतलब त अल्पसंख्यक होला लेकिन वास्तव में बहुसंख्यक लोग रहे|

एकरा दू भाग में टुटला के ठीक साल भर बाद रूस के जापान से लड़ाई भईल| इ लड़ाई मंचूरिया अउरी कोरिया दुनो प कब्ज़ा पावे के रहे| जबकी मंचूरिया रूस के कब्ज़ा में रहे आ कोरिया जापान के कब्ज़ा में रहे| दुनो पक्ष के चाहत कि दुनो जगह प एकाधिकार हो जाव| एह लड़ाई में रुष बहुते गन्दा तरह से हारी गईल| एह लड़ाई में मानव जाती के खूब नरसंहार भईल जवन क्रांति के जर बनल| पहिला में 1905 में क्रांति भईल| एह क्रांति में मांग उहे रहल जवना में मजदूरन के अधिकार मिलो आ रहे के बढ़िया व्यवस्था जवना से मानव जाती के इज्जत सुनिश्चित कईल जा सके| जारशाही शासन के राजा जार एह स्ट्राइक आ आन्दोलन के दबावे के पूरा कोशिश कईले अउरी आर्मी के भी पूरा उपयोग कईले| क्रांति अउरी तीत हो गईल जवना के बाद में जार कुछ्ह छुट दिहले एकरा के अक्टूबर क्रांति के नाम से भी जानल जाला|

एकर परिणाम इ भईल कि रूस के पार्लियामेंट ड्यूमा के स्थापना भईल| लेकिन इ बहुत ही ज्यादा कमजोर रहे| इ ठीक ओकरे लेखा रहे जईसे दिल्ली में लोकपाल खातिर खूब आन्दोलन त भईल लेकिन अंत में आपन कुर्सी बचावे के खातिर एगो कमजोर लोकपाल के कशकौल थमा देवल गईल| ड्यूमा में रईस अउरी बड लोग के ही बोलबाला रहे| ओहिजा आम आदमी के कवनो प्रतिनिधित्व ना रहे| सैधांतिक तौर प काम अभी हो ना पावल रहे खाली प्रोटेस्ट दबावे के खातिर कमजोर ड्यूमा नाम के मुखौटा दे देवल गईल रहे| एगो निक बात इ रहे कि ड्यूमा के स्थापना के बाद जेकरा के प्रधानमंत्री बनावल गईल रहे उ जुझारू आ कर्मशील नेता रहन जेकर नाम रहे पीटर स्टोलीपिन|

इनकर काम धाम मात्र पांच साल (1906-11) तक ही चल पाइल| इ जार निकोलस खातिर खतरा साबित हो सकत रहन| एह से जार इनका में 1911 में इनका के मरवा देले रहन| भूमिसुधार के बढ़िया निति अउरी मजदुर लोगन के अच्छा व्यवस्था जार निकोलस के खटकत रहे| ठीक तिन साल बाद पहिला विश्व युद्ध शुरू भईल| एह में रूस नेस्तनाबूद हो गईल आरहे| सैनिक अउरी नागरिकन के लाखन के संख्या में नुकसान पहुचल रहे| अर्थव्यवस्था प भी बुरा असर परल| सामान के सप्लाई चैन बंद होखला से चलते खाद्य के कमी परे लागल रहे| इ सब एगो असली क्रांति के पुकार करत रहे| जवन पहिला विश्व युद्ध के 3 साल बाद अउरी आज के सौ साल पहिला 1917 में भईल रहे| इ क्रांति दुगो फेज में भईल रहे| पहिला फेज के शुरुआत मार्च में भईल आ दूसरा के नवम्बर में| मजदुर वर्ग लाखन के तादाद में सड़क प निकल के आ चुकल रहे आ जार निकोलस के जनता हाउस अरेस्ट कर लिहलस| जार निकोलस स्वेच्छा से सत्ता अपना भाई माइकल के साथ में सौपे के तईयार हो गईले लेकिन उनकर भाई क्रांति देखि के सत्ता स्वीकारे के इनकार कर दिहले|

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एकरा बाद ड्यूमा में ताकत मिलल जब जारशाही से पीछा छुटल| पहिला हाली सरकार त लोकतांत्रिक दल के बनल लेकिन बिना चुनाव के बनल| इ पहिला बरियार गलती रहे| दूसरा गलती इ भईल कि पहिला विश्व युद्ध के इ लोकतांत्रिक सरकार अपना के पीछे खिचे के इनकार करत रहे| हालाँकि एह में भी बहुत भेदभाव रहे ज्यादातर बड़हन पोस्ट प मेन्शेविक गुट के लोग ही रहे| खैर, दूसरा फेज में दूसरा गुट बोल्शेविक आपन आवाज बुलंद करे लागल रहे| एह गुट के आवाज दबावे खातिर उहे तरीका अपनईलस जवन कि जार निकोलस मेन्शेविक के दबावे खातिर अपनईले रहन| नेता लोगन के जेल में डालल अउरी आर्मी से बर्बरता करवावल माध्यम रहे| कहानी में फिर ट्विस्ट आइल जब तीसरा गुट आर्मी आपन सत्ता लावे के कोशिश करे लागल| अब त मेन्शेविक लोगन के हाथ से आर्मी खिसके लागल रहे| तब इ लोग ओही बोल्शेविक से मदद मंगले जेकरा के जेल में बंद कईले रहन| ओकरा पीछे कारण रहे कि बोल्शेविक लोगन के लगे रेड गार्ड नामक आर्मी रहे|

एकरा बाद लेनिन के वापसी भईल अउरी जगह जगह जाके भाषण के माध्यम से प्रचार प्रसार शुरू कर दिहले| सबकुछ देश में बोल्शेविक गुट के कंट्रोल में आ चुकल रहे| ठीक एकरा बाद रूस में गृह युद्ध भईल| दुगो गुट बनल पहिला रेड गुट जवना में खाली बोल्शेविक लोग रहे| दूसरा गुट वाइट गुट, एह गुट में जार के समर्थक लोग रहे| जईसे जमींदार, रईस, मेन्शेविक आ चर्च के लोग| सबसे आपन आपन फायदा रहे| जमीनदार लोगन के जमीन के चिंता रहे, रईस लोग के आपन धन के चिंता रहे चर्च के पुजारी के धर्मनिरपेक्ष बने के चिंता रहे अउरी मेन्शेविक वैचारिक विभिन्नता मुख्य चिंत रहे| फिर एह सब लोग के हार भईल|

वाइट हारी गईल अउरी बोल्शेविक के रेड गुट जित गईल| एह सिविल वार के ठीक बाद सोवियत यूनियन के गठन 1922 में भईल| बोल्शेविक लोग साम्यवादी भईल अउरी साम्यवादी दल के उदय भईल| साम्यवादी व्यवस्था विशेष एह से रहे काहे कि एगो बहुत बड जारशाही के खात्मा गईले रहे| एकर मुख्य थीम एहे रहे कि देश के सारा संसाधन के राष्ट्रीयकरण होखे आ निजी प्रॉपर्टी के खत्म कईल जा सके| इ क्रांति सही मायना में समता के बात कईले रहे ना त अमेरिकी अउरी फ़्रांसिसी क्रांति के बाद भी मेहरारुन के भोट देवे के आधिकार ना मिल पावल रहे|

एकरा बाद सबसे बड चीज इ भईल कि जतना भी पूंजीवादी देश रही स सब के सब ढीला पड़े लाग गईल रही सन| लोगन के लोकनीति के बारे में सोचे शुरू कर देले रही सन| उदारहण के रूप में हमनी इहाँ जवन के प्रभाव परल, पहिला चीज वर्कनेस कंपनसेशन एक्ट 1923 में आइल, फैक्ट्री एक्ट आइल 1948 में, मटेरेंनिटी बेनिफिट एक्ट आइल 1961 में| इ सब तत्व जवन ओह क्रांति से निकलल इ पूरा दुनिया के बदल के रख देलस| पूंजीवाद जरूर रहल लेकिन ओकरा बाद अब उ रही ना गईल जवन पाहिले रहे| पाहिले से कहीं न कहीं फीका जरूर पडल रहे| आज अगर समाजवाद के नाम भारत जईसन देश में लेवल जाला त लोगन के मजाक बुझाला अउरी महसूस करेला लोग कि इ लोग गरीबी के जश्न मनावे वाला लोग हवे| जबकी इ सत्य नइखे| काहे कि एह विचार के हवा देवे वाला लोगन में राममनोहर लोहिया जेकरा नाम प आजो यूपी आ बिहार में सरकार बनेला, जय प्रकाश नारायण अउरी नरेन्द्र देव जईसन नेता लोग रहल बा| अब सवाल इ उठत बा कि जब सबकुछ अतना अच्छा बा तब फेल काहे भईल?

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हमरा समझ से पहिला आ मुख्य कारण इ बा कि समय के साथे कबो सार्थक बदलाव नईखे कईले| उदा. के रूप अगर भारत के लेवल जाव त जवना घरी राजीव गाँधी भारत में कंप्यूटर लावे के बात करत रहन ओह घरी सबसे ज्यादा साम्यवादी लोग विरोध कईले रहे| ओह लोग के लागत रहे कि इ लोगन के हाथ काट दिही| दूसरा कारण इ भईल कि विकास के क्षेत्र में नया प्रयोग से हमेशा रोके के कोशिश कईले बा| इ ओह प्रतिस्पर्धा के जन्म नइखे देवे देले जवना में लोग समय के साथे चीज के निखार पावे| तीसरा इ कि सोवियत यूनियन के 1991 में विघटन होखला के बाद से साम्यवादी व्यवस्था चरमरा गईल|

चौथा आ सबसे महत्वपूर्ण बात इ कि अब कोई साम्यवादी रही नइखे गईल| जईसे चीन के मानल जात रहे लेकिन नवउदार के हिमायती करे वाला सबसे पहिला देश ह ओकर निरंतर उपयोग करके आपन आर्थिक विकास कर रहल| इ चीज भी अब कोई से छुपल नईखे कि चीन अपना देश के मजदूरन के शोषण करके दोसरा देश में माल डंप करे के कोशिश करेला| खाली नाम के ही साम्यवाद रह गईल बा नु| रूस में ही देख लेवल जाव सत्ता पावे के खातिर नेता खुद अपना देश में बमबारी करवावेला फिर पडोसी देश के नाम लेके अटैक करके लोगन के इमोशन जुटावेला|

एह से अब उ वाला बाइनरी डिस्कोर्स रहिए नइखे गईल जवना में पूंजीवादी बनाम साम्यवादी के बात होत रहे| अमेरिका जईसन पूंजीवादी देश वेलफेयर प खुल के खर्चा कर रहल बा| चाइना जईसन साम्यवादी देश नवउदारवाद के सबसे बड हिमायत करे वाला देश ह| इ दू गो बड उदाहरन बा जवन एह बात के तय करत बा कि अब 20वां शताब्दी लेखा कवनो एगो चीज के पकड़ के देश चलावे के मूड में नइखे| 21वां शताब्दी के देश मिश्रित विचार प देश के चलावे के नोहोरा कर रहल बा|

नोट :- इ लेख ‘सोवियत क्रांति के सौ बारिस बाद साम्यवादी व्यवस्था प चिंतन’ आखर पत्रिका के मई-जून संयुक्तांक अंक में छप चुकल बा|

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