स्वतंत्र भारत के झांकी : भाग – 31 (आर्थिक क्रांति के दौर)

अध्याय – 4 “लोकतांत्रिक क्रांति अउरी राजनितिक उथल-पुथल  – 7

आर्थिक क्रांति के दौर

भूमिका….

अभी तक हमनी के पहिला अध्याय ‘राष्ट्र एकीकरण के चुनौती’ के बारे में देखनी जा| एह अध्याय में हमनी के एह बात से अवगत भईनी जा कि कईसे लार्ड माउंटबेटेंन, सरदार पटेल, जवाहर लाल नेहरु अउरी वी.पी. मेनन के टीम पाहिले त्रावनकोर ओकरा बाद जोधपुर, जैसलमेर, जूनागढ़, हैदराबाद अउरी कश्मीर के एकीकरण करे में सफल भईले जा| दूसरा अध्याय ‘देश के भीतर मूलभूत एकीकरण’ में हमनी के देखनीजा कि कईसे सबसे पहले प्रशासनिक एकीकरण भईल, ओकरा बाद आर्थिक एकीकरण, सामाजिक एकीकरण भईल| एकरा अलावां राज्यन के भाषाई एकीकरण अउरी क्षेत्रीयता के खिलाफ एकीकरण प भी चर्चा कईनी जा| ओकरा बाद तीसरा अध्याय ‘भारत के पडोसी देशन से युद्ध’ शुरू भईल जवन भारत के पडोसी देशन के साथे भईल सारा युद्ध भईल, ओकरा बारें में विस्तार से चर्चा भईल| पहिले भारत-पाकिस्तान 1947 के बात भईल ओकरा बाद 1962 के भारत-चीन युद्ध, फिर पाकिस्तान के साथे भईल 1965, 1971 अउरी 1999 के कारगिल युद्ध के बात भईल|

चउथा अध्याय लोकतांत्रिक क्रांति अउरी राजनितिक उथल-पुथल शुरू हो चुकल बा| एह अध्याय के पहिला अंक में आपातकाल के शुरुआत के बारे में चर्चा भईल| ओकरा बाद दूसरा अंक में जयप्रकाश नारायण आन्दोलन के बारे में बृहत रूप से चर्चा भईल| ओकर अगिला तीसरा अंक में जनता पार्टी के उदय के बारें में चर्चा भईल रहे| एकर चउथा अंक में जनता पार्टी के विघटन अउरी कांग्रेस के वापसी के बारे में चर्चा हो चुकल बा| एह अध्याय के पांचवां अंक में लिट्टे के उदय अउरी राजीव गाँधी के कईसे हत्या भईल एकरा बारे में भईल रहे| एह अंक में आर्थिक क्रांति के दौर के बारें में बढ़िया से चर्चा होई|

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औपनिवेशिक शासन काल से पहिले भारत के भीरी एगो विकसित अर्थव्यवस्था रहे| विश्व के बाकी के भुभागन से एगो मजबूत व्यापारिक संबंध भी रहे| भारत के अर्थव्यवस्था असल बर्बाद भईल औपनिवेशिक शासनकाल के दौरान| औपनि‍वेशि‍क युग (1773–1947) के समय अंग्रेज भारत से सस्ता दर प कच्चा सामान खरीदत रहे लोग अउरी तईयार माल भारत के बाजारन में सामान्‍य मूल्‍य से कहीं जादा दाम प बेचत रहे| एकरा परि‍णामस्‍वरूप संसधानन के द्विमार्गी ह्रास होत रहे| भारत में प्रारंभिक आक्रमणकारियन अउरी ब्रिटिश साम्राज्यवादिन में मुख्य अंतर इहे रहे कि अंग्रेजन के अलावां बाकी के कवनो अन्य प्रारंभिक आक्रमणकारी ना ही भारतीय अर्थव्यवस्था के संरचना में बदलाव कईले रहे अउरी नाही धन के निरंतर निकासी के सिद्धांत अपनइले रहे| शुरू के आक्रमणकारीयन के राजनितिक सत्ता हासिल कईल अउरी ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र के अपना राज्य में मिलावल लक्ष्य रहे| ब्रिटिश इंडिया के लक्ष्य रहे कि उ राजनितिक सत्ता भी हासिल करो अउरी भारत जईसन औपनिवेशिक देशन के संसाधानन के शोषण करके ब्रिटेन के विकास कईल जा सके|

एकर परिणाम इ भईल कि अंग्रेजी माल के भारतीय बाजार में आ जाए से भारतीय हस्तशिल्प के भारत में नुकसान भईल, जबकि कारखानन के खुले से यूरोपीयन बाजार में भारतीय हस्तशिल्प लोग के नुकसान भईल| भारत में बहुत सारा शहरन के पतन अउरी भारतीय शिल्पियन के गांव के तरफ पलायन के मुख्य कारण अनौद्योगीकरण ही रहे| भारतीय दस्तकार आपन परंपरागत व्यवसाय के त्याग के गांव में जाके खेती करे लागल रहे| भारत जईसन एगो सम्पूर्ण निर्यातक देश के आयातक देश बनवला में औपनिवेशिक शासन के निति ही जिम्मेदार रहे| किसान लोगन के स्तिथि ख़राब होखत चल गईल| जमींदारन द्वारा किसानन के शोषण होखे लागल रहे| जमीन के उर्वरता निरंतर शोषण के चलते बर्बाद होत चल गईल| कर्ज खातिर सुदखोरन प निर्भरता बढ़ गईल| अकाल अउरी प्राकृतिक आपदा जईसन चीज के आना लाजमी हो गईल| अकाल के दिनन में चारान के आभाव में पशुअन के मृत्यु हो जात रहे अउरी पशुअन आ संसाधनन के आभाव में कई बार किसान खेतीए ना कर पावत रहे| एकर परिणाम निष्कर्ष के रूप में इहे आइल कि एह अवधि‍ के दौरान वि‍श्‍व के आय में भारत के हि‍स्‍सा 1700 ईस्वी के 22.3 प्रतिशत से गि‍रके 1952 में 3.8 प्रति‍शत रह गईल|

1947 में भारत के स्‍वतंत्रता मिलला के बाद अर्थव्‍यवस्‍था के पुननि‍र्माण के प्रक्रि‍या शुरू भईल| एह उद्देश्‍य से विशेष योजना बनावल गईल अउरी पंचवर्षीय योजनान के माध्‍यम से कार्यान्‍वि‍त कईल गईल| आज़ादी के बाद भारत के तात्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नॉन-अलाइंड मूव्मेंट के भारत के प्रमुख विदेश नीति बनईले| एह दौरान भारत सोवियत रूस से दोस्ती बढइलस जहाँ समाजवादी शासन रहे| हालाँकि भारत समाजवाद के पूरा तरह से ना अपनइले रहे लेकिन भारत के आर्थिक नीति में समाजवाद के लक्षण कहीं न कहीं साफ़ लउकत रहे|  भारत में ज्यादातर उद्योगन के सरकारी नियंत्रण के अंतर्गत रखल गईल रहे| एकरा खातिर नियम भी बनावल गईल रहे| एह तरह के नीतियन के कईगो अर्थशास्त्री लोग लाइसेंस राज अउरी इंस्पेक्टर राज के नाम देले रहे| बिजली, रास्ता, पानी, टेलीफोन, रेल, हवाई यातायात, होटल, एह सब प सरकारी नियंत्रण रहे| एह में दिक्कत इ रहे कि आ त निजी क्षेत्रन के एह उद्योगन में पूंजी निवेश के अनुमती ना रहे, ना त बहुत ही नियंत्रित अनुमती रहे|

एकरा अलावां बाक़ी के कईगो उद्योगन में जईसे खेलौना बनावल, रीटेल आदि बड़ निजी कम्पनियन के पूंजी निवेश के अनुमती ना रहे| बैंकनो के सरकारी नियंत्रण में रखल गईल रहे| 1951 से 1979 तक भारतीय आर्थिक विकास दर 3.1% रहे| पर कैपिटा विकास दर 1% रहे| विश्व में एकरा के ‘हिन्दू ग्रोथ रेट’ के नाम से जानल जात रहे| भारतीय उद्योगन के विकास दर 5.4% रहे| कृषि विकास दर 3% रहे| भारत के कमजोर आर्थिक विकास बहुत सारा कारण रहे| जईसे देश में तकनीक के ओतना विकास ना हो पाइल| पहिला, कृषि उद्योगन मे संस्थागत कमी रहल| दूसरा, भारत के अर्थव्यवस्था विश्व के दोसर विकासशील देशन से एकीकृत ना हो पावल| तीसरा, तब तक पडोसी देशन, चीन अउरी पाकिस्तान के साथ चार गो युद्ध भईल जवना के चर्चा पिछला अध्याय में विस्तृत से भईल रहे| चौथा, बंग्लादेशी शरणार्थियन के वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था कहीं न कहीं प्रभावित भईल रहे| पांचवां, एकरा अलावां 1965, 1966, 1971 अउरी 1972 में आइल भयानक सुखा एगो मुख्य कारनन में से एगो रहे|

छठा, देश में वित्तीय संस्था अतना सजग भी ना रहे अउरी एकर विकास भी समय अनुसार ना भ पाइल रहे| सातवाँ विदेशी पूंजी निवेश अउरी निजी कम्पनियन के निवेश प बहुत अडंगा लगावल गईल रहे| आठवां शेयर बाजार आदि में बहुत सारा छोट-बड घोटाला होत रहल| एकरा अलावां अउर भी छोट-छोट कारन रहे जवना के चलते आजादी के बाद से तब तक आर्थिक विकास ओतना ना हो पावल रहे जतना होखे के चाहत रहे| भुगतान संतुलन (बैलैंस औफ पेमेंट) के समस्या असल रूप से 1985 में ही शुरू भईल रहे| इ समस्या एक दिन में ना उपजल रहे| धीरे-धीरे बढ़त गईल अउरी चन्द्रशेखर सरकार के शासन के समय भारत मे बैलैंस औफ पेमेंट के समस्या विकराल रूप धारण कईलस अउरी भारत के पहिले से चर्मराइल अर्थव्यवस्था ठेहुना प आ गईल| भारत मे विदेशी मुद्रा के भंडार (फोरेक्स रिज़र्व) मात्र तीन हप्तान के आयातन (इम्पोर्ट) के बराबर रह गईल| इ एगो बहुत ही गम्भीर समस्या रहे| सरकार दिवालिया होखे के कगार प आ गईल रहे| भारतीय रिजर्व बैंक नया क्रेडित देवल बंद क देले रहे| सबसे पाहिले इ चीज जानल जाव कि एह आर्थिक संकट में मूल वजह का रहे| चुकी उपर देवल कारण भी उचित बा लेकिन सतही बा|

एकर मुख्य कारनन के ज़ूम इन क के देखल आ जानल बहुत जरूरी बा| पहिला आ मुख्य कारण भारत के पश्चिमी एशिया के तेल, अफ्रीका से सोना अउरी अमेरिका के तकनीक के जरूरत रहे| एह सब खातिर डॉलर के जरूरत रहे| भारत तब तक अमरीका अउरी अन्य बड़ पूँजीवादी शक्तियन के साथे अच्छा व्यापारिक सम्बन्ध ना बना पवले रहे| एह से सोवियत संघ ही भारतीय माल के सबसे बड़ निर्यातक बनल रहे| 1987 के बाद से सोवियत संघ के राजनीतिक, आर्थिक स्थिति कमज़ोर होखे लागल रहे| 1991 में सोवियत संघ के विघटन हो गईल रहे| भारत के निर्यात प एकर नकारात्मक असर भईल रहे| भारत के एगो बड बाजार सोवियत संघ रहे जवन टूट गईल| परिणामस्वरुप डॉलर के आगमन धीरे-धीरे कम होत चल गईल| एकरा चलते धीरे-धीरे फोरेक्स रिज़र्व ख़तम होखे के कगार प आ गईल रहे| दूसरा कारण रहे कि 1990 में सदाम हुसैन कुवैत प अटैक कईले रहन| एकरा चलते अमेरिका के इराक से अगिला साल लड़ाई भईल| इराक अउरी कुवैत तेल के बहुत बड निर्यातक रहे| एकरा चलते भईल का कि तेल के दाम बढ़त चल गईल जवना से हमनी के डॉलर के खर्चा निरंतर बढ़त चल गईल|

तीसरा बड कारन इ रहे कि भारत के राजनितिक सिस्टम बहुत उथल-पुथल रहे जवना के चर्चा पीछे के अंक में हो चुकल बा| एकरा अलावा बोफोर्स घोटाला, शाहबानो केस आदि से भारत में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो गईल रहे| 1989 में राजीव गाँधी सरकार के हार के सामना करे के पडल रहे| एह अस्थिरता से भारत के उद्योग धंधा चउपट होत रहे| इ स्थिति महंगाई, बेरोजगारी के अउरी भयानक बनावत रहे| चउथा मुख्य कारण इ रहे कि भारत के सेंट्रल बैंक RBI (रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया) के काम-धाम लचर रहे| एक्सचेंज रेट खुला ना रहे| ओह घरी एक्सचेंज रेट RBI ही निर्धारित करत रहे कि 1$ में कतना रुपया होई| एह से होत का रहे कि बहरी कुछो होत रहे लेकिन भारत में एक्सचेंज रेट के लेके नीतिगत बदलाव ना हो पावत रहे| एह से भारत के फोरेक्स रिज़र्व प नकारात्मक प्रभाव पड़त रहे| उदाहरण के तौर प $1=रु50 बा लेकिन अंतराष्ट्रीय बाजार में युद्ध के चलते तेल के दाम बढ़ गईल बा लेकिन फिर भी इहे रेट रही भारत के ज्यादा पईसा खर्च करे के पड़ी|

एकरा अलावां बैंकिंग सिस्टम भी लचर ही रहे| पाहिले CRR (कैश रिज़र्व रेशिओ) 15% अउरी एसएलआर (स्टेचूटरी लिक्विडिटी राशियो) 40% रहे जवन कि कुल पईसा आईला गईला के 50% से भी ज्यादा रहे| जानकारी खातिर बता देत बानी कि CRR आ भा एसएलआर उ पईसा ह जवना के बैंक उपयोग ना करेले बल्कि असही ध देवे ले| एगो बनावटी उदाहरन से एकरा के समझी| मान लिही कि लोग आज बैंक में 125 रुपया डललस अउरी 25 रुपया निकललस| दुनो के घटा के बाची 100 रुपया| एह 100 रुपया के 15%(CRR)+40%(एसएलआर) यानी कि 55 रूपया किनारे रख देवल जात रहे जवना के उपयोग प बैंक के मनाई रहे| अब सवाल उठत बा काहे मनाई रहे? एह से रहे काहे कि मान लिही सारा पईसा बैंक लोन में दे देलस अउरी ओह दिन लोग पईसा मांगे ढेर आ जाई त कहाँ से देब? एह से फायर फाइटिंग खातिर इ रखल जात रहे| दोसरा शब्द में कहीं त बैंक के एकरा से कवनो फायदा ना होत रहे बल्कि उलटे बैंक के एकर ब्याज जनता के देवे के परत रहे| कहीं न कहीं पईसा के बहाव के रोकत रहे| हालाँकि एह घरी CRR 4 अउरी एसएलआर लगभग 23 के आस पास बा| बैंकिंग सिस्टम भी ओह आर्थिक संकट के जिम्मेदार कड़ी में एगो रहे|

नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाला भारत सरकार भारत मे बड पैमाना प आर्थिक सुधार करे के फैसला कईलस| उदारीकरण कहावे वाला एह सुधारन के आर्किटेक्ट मनमोहन सिंह रहले| मनमोहन सिंह आवे वाला समय में भारत के आर्थिक निति के पूरा बदल देवे के प्रयास कईले| इ समस्या कईसे हल भईल अगिला अंक में देखल जाई……

 

See also  स्वतंत्र भारत के झांकी : भाग – 14
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